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रंग लाई PM मोदी की मेहनत, ‘मेक इन इंडिया’ ने ‘मेड इन चाइना’ को दी पटखनी। देखिये...


मेड इन कंट्री इंडेक्स से साफ है कि घटिया और सस्ते उत्पादों के दम पर चीन भले ही दुनियाभर में अपनी बादशाहत दिखाता हो, लेकिन गुणवत्ता और भरोसे के मामले में वह भारत से काफी पीछे है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना ‘मेक इन इंडिया’ की धमक धीरे-धीरे दुनिया तक पहुंच रही है। प्रधानमंत्री मोदी की अपार मेहनत के बाद ‘मेक इन इंडिया’ रंग दिखाने लगी है। गुणवत्ता भरे उत्पादों की बात की जाए तो भारत में बने उत्पाद लोगों को दुनिया में काफी पंसद आ रहे हैं। सोमवार को जारी मेड इन कंट्री इंडेक्स (MICI-2017) में भारत ने उत्पादों के गुणवत्ता के मामले में चीन से सात पायदान ऊपर आ गया है।
यूरोपीय यूनियन और दुनिया के 49 देशों को लेकर जारी इस इंडेक्स में भारत को 36 अंक मिले हैं, जबकि चीन को 28 से ही संतोष करना पड़ा है। इस इंडेक्स में पहले पायदान की बात की जाए तो सौ अंकों के साथ जर्मनी शीर्ष पर है और दूसरे स्थान पर स्विट्जरलैंड है। 50 देशों की इस सूची में भारत को 42वां स्थान मिला है जबकि चीन आखिरी से एक पायदान ऊपर 49वें स्थान पर है। इससे साफ है कि भारत धीरे-धीरे उत्पादों के गुणवत्ता के मामले में दुनिया भर में अपनी पहचान बनाने लगा है।
यह सर्वे दुनियाभर के 43,034 उपभोक्ताओं की संतुष्टि के आधार पर स्टैटिस्टा ने अंतरराष्ट्रीय शोध संस्था डालिया रिसर्च के साथ मिलकर किया है। यूरोपीय संघ समेत इस सर्वे में शामिल हुए 50 देश दुनिया की 90 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। सर्वे में उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा मानक, कीमत की वसूली, विशिष्टता, डिजायन, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, भरोसेमंद, टिकाऊपन, सही तरीके का उत्पादन और प्रतिष्ठा को शामिल किया गया है। इंडेक्स से साफ है कि घटिया और सस्ते उत्पादों के दम पर चीन भले ही दुनियाभर में अपनी बादशाहत दिखाता हो, लेकिन गुणवत्ता और भरोसे के मामले में वह भारत से काफी पीछे है।
आपको बता दें, सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2014 को ‘मेक इन इंडिया’ मुहीम की शुरुआत की थी। इस अभियान के तहत विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि भारत पनडुब्बी से लेकर सेटेलाइट तक खुद बनाने में सक्षम हो चुका है। 2014 में देशी कंपनियों द्वारा निर्मित मंगलयान मंगल की कक्षा में पहले प्रयास में स्थापित करने वाला भारत दुनिया का एकमात्र देश बना।




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