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ये नेहरू है, ये एक मुस्लिम धर्मगुरु, एक मौलाना अर्थात मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को भारत का शिक्षामंत्री बना रहा है, जी हां
भारत का पहला शिक्षा मंत्री एक मौलाना था
किसी को आपत्ति नहीं हुई थी की सेक्युलर देश में एक मौलाना शिक्षा मंत्री कैसे बनाया जा रहा है
क्या भारत की शिक्षा को मदरसा छाप बनाना है, किसी को आपत्ति नहीं हुई, एक मौलाना शिक्षा मंत्री बनाया गया तो सेक्युलर तत्वों ने कहा की इस से तो भाईचारा मजबूत होगा
इस देश में पगड़ी और कड़े वाला शख्स मुख्यमंत्री बन सकता है, यहाँ तक की हिजाब और बुरखे वाली भी मुख्यमंत्री बन सकती है, पर सेक्युलर तत्वों को आपत्ति तो सिर्फ योगी आदित्यनाथ से है
एक महंत कैसे मुख्यमंत्री बन सकता है !!
बड़े बड़े सेक्युलर तत्व आज बीजेपी की आलोचना कर रहे है, इनका यहाँ तक कहना है की संविधान खतरे में है एक महंत के मुख्यमंत्री बनने से
ये लोग पता नहीं किस संविधान की बात कर रहे है
क्योंकि संविधान में कहीं नहीं लिखा की एक महंत चुनाव नहीं लड़ सकता, विधायक मंत्री इत्यादि नहीं बन सकता, योगी आदित्यनाथ तो पुरे कानून के हिसाब से मुख्यमंत्री बने है, कोई जबरन कब्जा थोड़ी किया है कुर्सी पर, परंतु हमारे सेक्युलर तत्व और इनका दोगलापन तो देखने लायक है
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