सुकमा में हुई नक्सली हमले ने एक बार फिर फिर साबित किया है कि बस्तर के इस इलाके में किसका सिक्का चलता है. यहां नक्सली कमांडर मडवी हिडमा की तूती बोलती है. अब तक मिले सुरागों से पता चलता है कि हिडमा ही इस हमले का मास्टरमाइंड है.
कौन है हिडमा?
मडवी हिडमा उर्फ हिडमन्ना की उम्र 25 साल है. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक वो सुकमा में जंगरगुंडा इलाके के पलोडी गांव का रहने वाला है. इस इलाके में लोग उसे हिडमालु, और संतोष के नाम से भी जाना जाता है. बीते करीब एक दशक के दौरान उसका खौफ इस कदर फैला कि अब वो इस इलाके का मोस्ट वॉन्टेड नक्सली है. पुलिस ने उसपर 25 लाख रुपये के ईनाम का ऐलान किया है.
मडवी हिडमा उर्फ हिडमन्ना की उम्र 25 साल है. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक वो सुकमा में जंगरगुंडा इलाके के पलोडी गांव का रहने वाला है. इस इलाके में लोग उसे हिडमालु, और संतोष के नाम से भी जाना जाता है. बीते करीब एक दशक के दौरान उसका खौफ इस कदर फैला कि अब वो इस इलाके का मोस्ट वॉन्टेड नक्सली है. पुलिस ने उसपर 25 लाख रुपये के ईनाम का ऐलान किया है.
नक्सलियों के टॉप नेताओं में शुमार हिडमा
माओवादियों के बीच हिडमा को बेहतरीन लड़ाका और रणनीतिकार माना जाता है. गुरिल्ला लड़ाई में उसे महारत हासिल है. यही वजह है कि उसे पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की बटालियन-1 का कमांडर बनाया गया है. इस बटालियन के तहत नक्सलियों की तीन यूनिट्स काम करती हैं. ये बटालियन सुकमा और बीजापुर में सक्रिय है. इसके अलावा हिडमा माओवादियों की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) का भी सदस्य है.
माओवादियों के बीच हिडमा को बेहतरीन लड़ाका और रणनीतिकार माना जाता है. गुरिल्ला लड़ाई में उसे महारत हासिल है. यही वजह है कि उसे पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की बटालियन-1 का कमांडर बनाया गया है. इस बटालियन के तहत नक्सलियों की तीन यूनिट्स काम करती हैं. ये बटालियन सुकमा और बीजापुर में सक्रिय है. इसके अलावा हिडमा माओवादियों की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) का भी सदस्य है.
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कई हमलों में हाथ
बीते कुछ सालों में हिडमा कई बड़ी वारदातों को अंजाम दे चुका है. 11 मार्च को सुकमा में ही माओवादियों ने 12 जवानों को शहीद किया था. इस हमले का मास्टरमाइंड भी हिडमा ही था. हाल ही में सुकमा से कनाडा के एक सैलानी को अगवा करने के पीछे भी हिडमा का ही हाथ बताया जाता है. माना जाता है कि 2010 में चिंतलनार में हुए हमले के पीछे भी हिडमा का ही दिमाग था. इसमें 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे. इसके अलावा 2013 में झीरम घाटी में कांग्रेसी नेताओं के काफिले पर हुए हमले में भी हिडमा शामिल था. सुरक्षा एजेंसियां जानती हैं कि वो फिलहाल बुर्कापाल और चिंतागुफा में सक्रिय है. लेकिन उसके ठिकाने की सही-सही जानकारी किसी को नहीं है. इसकी एक वजह इस इलाके को ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा के नजदीक होना है. इससे नक्सली हमलों को अंजाम देने के बाद आसानी से दूसरे राज्यों में जाकर छिप जाते हैं.
बीते कुछ सालों में हिडमा कई बड़ी वारदातों को अंजाम दे चुका है. 11 मार्च को सुकमा में ही माओवादियों ने 12 जवानों को शहीद किया था. इस हमले का मास्टरमाइंड भी हिडमा ही था. हाल ही में सुकमा से कनाडा के एक सैलानी को अगवा करने के पीछे भी हिडमा का ही हाथ बताया जाता है. माना जाता है कि 2010 में चिंतलनार में हुए हमले के पीछे भी हिडमा का ही दिमाग था. इसमें 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे. इसके अलावा 2013 में झीरम घाटी में कांग्रेसी नेताओं के काफिले पर हुए हमले में भी हिडमा शामिल था. सुरक्षा एजेंसियां जानती हैं कि वो फिलहाल बुर्कापाल और चिंतागुफा में सक्रिय है. लेकिन उसके ठिकाने की सही-सही जानकारी किसी को नहीं है. इसकी एक वजह इस इलाके को ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा के नजदीक होना है. इससे नक्सली हमलों को अंजाम देने के बाद आसानी से दूसरे राज्यों में जाकर छिप जाते हैं.
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