नई दिल्ली। आपने अक्सर पुलिस को कुत्ते के साथ देखा होगा। दरअसल वे बारूदी सुरंग और विस्फोटक की महक का पता आसानी से कर लेते हैं। इस कारण इनका इस्तेमाल किया जाता है।साल 1960 में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए बिल्लियों के जरिये सोवियत दूतावासों में जासूसी करती थी। बिल्ली में ऑपरेशन करके माइक्रोफोन बैटरी एंटीना लगा दिए जाते थे।
प्राचीन काल से ही कबूतरों को संदेशवाहक समझा जाता था। दोनों विश्व युद्धों में भी कबूतरों का इस्तेमाल बतौर संदेशवाहक किया गया। मगर इन्होंने बतौर फोटोग्राफर भी सेवाएं दीं। साल 1907 में इनके गले में कैमरा बांधकर फोटो लेने का प्रोजेक्ट था।
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