रिटायरमेंट लेने के बाद हर कोई आराम की जिंदगी जीना चाहता है और बहुत कम लोग होते हैं जो रिटायरमेंट के बाद भी कुछ सालों तक काम करते हैं। हालांकि इस डॉक्टर की कहानी सुनकर आप भी सलाम करेंगे। 91 साल की उम्र में भी यह डॉक्टर मुफ्त में मरीजों का इलाज कर मानवता का पाठ पढ़ा रही हैं।
डॉ. भक्ति यादव के चेहरे पर झुर्रियां हैं, हाथ कांपते हैं और चलने फिरने में भी परेशानी होती है, फिर भी रोज क्लिनिक टाइम से पहुंचती हैं और मरीजों का इलाज करती हैं। वे स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं और इंदौर की पहली महिला डॉक्टर हैं। वे वर्ष 1948 से ही मरीजों का बिना फीस के इलाज कर रही हैं।
डॉ. भक्ति यादव वर्ष 1952 में एमजीएम मेडिकल कॉलेज के पहले बैच की स्टूडेंट थीं और उस समय उनके बैच में वे अकेली महिला थीं। उनसे इलाज करवाने के लिए गुजरात और यहां तक कि राजस्थान से भी महिलाएं जाती हैं। डॉ. यादव की यही इच्छा है कि वे अपनी अंतिम सांस तक इसी तरह मानवता की सेवा करती रहें।

डॉ. भक्ति जी को हमारा सलाम क्योँकि मानव तो हर जगह जन्म लेता है मगर मानवता कहीं कहीं जन्म लेती है।
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