नई दिल्ली(25 अप्रैल): अमेरिका ने H-1B मुद्दे पर कहा है कि हम भारतीय कंपनियों के इन्वेस्टमेंट की कद्र करते हैं। साथ ही अमेरिका और भारत के बीच मजबूत इकोनॉमिक रिलेशन चाहते हैं। कुछ दिन पहले अरुण जेटली ने H-1B वीजा पर अपने अमेरिकी काउंटरपार्ट स्टीवन नूचिन के साथ बात की थी।
- विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्क टोनर ने कहा, "हम चाहते हैं कि भारत-अमेरिका के बीच बिजनेस के क्षेत्र में रिलेशन और मजबूत हों।"
- टोनर से H-1B वीजा के रिव्यू और उससे भारतीय कंपनियों पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल पूछा गया था।
- टोनर ने कहा, "यूएस इकोनॉमी में इन्वेस्टमेंट करने के लिए हम भारतीय कंपनियों के शुक्रगुजार हैं। उनके चलते हमारे यहां हजारों लोगों को जॉब मिला हुआ है।"
- "अगर वीजा को लेकर कोई और जरूरत होगी तो उसे जल्द अपडेट किया जाएगा। ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन वीजा प्रोसेस को मजबूत करने की ही कोशिशों में जुटा है।"
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- टोनर ने कहा, "ये ध्यान रखना जरूरी है कि हमारा काउंसलर ब्यूरो और दूर देशों में बैठे काउंसलर ऑफिसर्स, एम्बेसी कैसे काम करते हैं। किसी भी प्रोसेस का हमेशा रिव्यू होता रहता है ताकि न केवल इसमें मजबूती लाई जा सके बल्कि अमेरिकियों की सुरक्षा भी हो सके।"
- जेटली ने अपने अमेरिका दौरे के दौरान अमेरिकी फाइनेंस मिनिस्टर नूचिन से H-1B वीजा में कटौती को लेकर भारतीय कंपनियों पर असर की बात कही थी।
- बता दें कि डोनाल्ड ट्रम्प ने H-1B वीजा के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए है। इसका मकसद ज्यादा स्किल्ड और सैलरी पर लोगों को नौकरी पर लिया जाना है।
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