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अपने बालों को सीधे चमकदार बनाने के घरेलू नुक्से...

अपने बालों को सीधे चमकदार बनाने के घरेलू नुक्से...
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अगर आप भी है अपने घुंघराले बालो से परेसान तो हो जाइए चिंतामुक्त क्यों की आज हम आपको ऐसे घरेलू नुक्से बताने जा रहे है जिनसे से आपके बाल होगे सीधे व चमकदार! हर महिला चाहती हैं के उसके बाल घने, लंबे, और सुन्दर हो. ताकि वो अपने बालो के अलग-अलग स्टाइल कर सके. परंतु कई महिलाओ के साथ में पुरुषो के बाल भी घुंघराले  होते हैं. और वे अपने बालो को सीधा करने के लिए कई तरह के मार्किट में आये प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं. पर कई बार ये नुकसानदायक भी सिद्ध होते हैं. उस समय जब आप इन्हें इस्तेमाल करते हैं तब ये आपके बालो को चमकदार व् सुन्दर बना देते हैं. और बाद में यही बाल रूखे हो जाते हैं.


जानिए ऐसे ही कुछ घरेलु नुस्खे जिनसे आप आसानी से अपने बालो को सीधा कर सकते हैं-


@ मुल्तानी मिटटी के प्रयोग दवारा :

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मुल्तानी मिटटी आयर्वेदिक तरीके से इस्तेमाल की जाती हैं. सबसे पहले मुल्तानी मिटटी में तेल और चावल का आटा मिलाकर एक मिश्रण तैयार कर ले और फिर अपने बाल सुलझा कर इसे अपने बालो में लगाए. और इसे लगाने के बाद अपने बालो को सीधा रखे उन्हें मोड़े नहीं. ऐसा आपको महीने में दो से चार बार तक करनाचाहिए इससे आपके बाल स्ट्रेट हो जायेगे. और ये आयुर्वेदिक तरीके हैं इनका कोई नुक्सान भी नहीं होता.

@ अंडे और जैतून के तेल का प्रयोग दवारा :  

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बालों को मजबूत और चमकदार बनाने के लिए अंडा काफी फायदेमंद होता है। जैतून का तेल बालों को moisturized रखता है। इन दोनों को एकसाथ इस्तेमाल करने से बाल सीधे और मजबूत होते हैं। दो अण्डों को तोड़कर चार चम्मच जैतून के तेल में मिला लें। इस मिश्रण को अपने बालों और खोपड़ी में अच्छी तरह से लगा लें। इसे बाद मोटी कंघी से बालों को कंघी कर लें। अब shower cap पहनकर 30 से 45 मिनट के लिए छोड़ दें। अब बालों को rinse करके शैम्पू कर लें।

@ एलोवेरा के प्रयोग दवारा :

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एलोवेरा को घृतकुमारी के नाम से भी जाना जाता हैं. सबसे पहले एलोवेरा के अंदर का हिस्सा निकल कर अच्छे से पीस ले. और फिर इसमें कोई भी तेल मिक्स करके एक मिक्सचर तैयार कर ले. और फिर इसे अपने बालो में लगा ले. और इसे थोड़ी देर तक अपने बालो में लगा रहने दे. फिर शैम्पू से सिर धो ले. इससे आपके बाल चमकदार और सीधे हो जायेगे.

@ बीयर के प्रयोग दवारा :

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बीयर में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और विटामिन पाए जाते हैं जो बालों को स्वस्थ रखते हैं। साथ ही बीयर में मौजूद alcohol बालों पर cleansing और shine agent की तरह काम करता है। एक कप बीयर को मध्यम आंच में तब तक उबालें जब तक कि यह आधी न रह जाय। अब इसे ठंडा होने दें और फिर अपने regular शैम्पू की एक मात्रा में इसे मिला दें। अब इस घरेलू शैम्पू से अपने बाल नियमित धोएं। आप बीयर से बालों को सीधे rinse भी कर सकते हैं। आप उबली बीयर को एक स्प्रे बोतल में भर कर भी रख सकते हैं और कंडीशनर की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।

@ तेल के प्रयोग दवारा :

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रोजाना हलके गरम तेल की मालिश करके आप अपने बालो को मुलायम और हाइड्रेटेड रख सकते हैं. ये बालो को ठीक करने का सबसे आसान तरीका हैं. तेल की गर्मी घुंघराले  बालो को सेटल करने में मदद करती है|.गुनगुने तेल की मालिश के लिए नारियल, जैतून, बादाम का तेल सभी फायदेमंद है आप इनमे से किसी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
सबसे पहले तेल को हल्का गरम करे.इसके बाद इस तेल को अपने बालो पर लगाये और हलके हाथो से मसाज करे.फिर अपने बालो पर कंघी करे , ताकि धोते वक्त आपके ज्यादा बाल न टूटे. कम से कम आधे घंटे के लिए अपने बालो गरम पानी में भिगोये हुए तोलिये से ढके. अपने बालो को शैम्पू से धोये और उसके बाद चौड़े मुह वाली कंघी से बाल सुलझाए. इस तरह से आपके बाल सीधे और सिल्की हो जायेगे.

@ अरंडी का तेल के प्रयोग दवारा :

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अरंडी का तेल भी बाल सीधे करने के लिए काफी प्रचलित है। यह बालों को कंडीशन करके hydrated रखता है। यह बालों को घुंघराले होने से भी रोकता है और इन्फेक्शन से भी लड़ता है। दो बड़ी चम्मच अरंडी के तेल को एक बड़ी चम्मच सोयाबीन के तेल में मिला लें। अब इस मिश्रण को 20 seconds के लिए माइक्रोवेव में गर्म करें। अब इससे अपने बालों और खोपड़ी की मालिश करें। 30 मिनट बाद बालों को शैम्पू से धो लें। अब बालों की कंघी कर लें और सूखने के लिए छोड़ दें।

गर्भावस्था में रखे इन बातों की सावधानिया...

गर्भावस्था में रखे इन बातों की सावधानिया...
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गर्भावस्‍था के इन नौ महीनों में कुछ खतरे भी होते हैं जिनके बारेमें गर्भवती महिला को जानना बहुत जरूरी है, जिससे वह गर्भपात की संभावना को रोक सके। गर्भ धारण करने से लेकर प्रसव होने तक उन्हें अपना खयाल तरह से रखना चाहिए गर्भधारण के बाद बच्चे का विकास होना शुरू हो जाता है।


@ थकान :

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सो कर उठने के बाद कमजोरी और थकान महसूस करना Pregnancy problems में सबसे आम है ये समस्या पहले तीन महीने के दौरान ज्यादा महसूस होती है| हार्मोन में हो रहे परिवर्तनों के कारण ऐसा होता है| इस से घबराने की जरुरत नहीं है| गर्भावस्था के अनुरूप स्वस्थ आहार लेने और नियमित दिनचर्या का पालन करके आप इन समस्याओ को कम कर सकती है 

@ कमर दर्द :
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तीसरे महीने तक कमर दर्द बढ़ने लगता है, क्योंकि शरीर का तनाव और बच्चे का भार बढ़ता जाता है।
कुछ महिलाओं का कमर दर्द डिलीवरी के बाद खत्म हो जाता है , लेकिन जो महिलाऐं ध्यान नहीं रखती है , उनमें यह समस्या हमेशा के लिए घर कर जाती है। गर्भावस्था के दौरान ना तो भारी सामान उठाए और न ही सरकाए ! कामकाजी महिलाए ना तो सारा दिन सीट पर बैठी रहे और न ही देर तक खड़ी रहें। कुछ देर उठ कर टहल लें। जब उठे, तो शरीर को स्ट्रेच करें। नींद में कमी होना- गर्भावस्था के दौरान विभिन्न शारीरिक बदलावों के कारन अनिंद्रा की समस्या हो जाती है इस से निपटने के लिए चाय, कॉफ़ी, कैफीन, अल्कोहल और वसा युक्त खाने से परहेज रखना चाहिए |



@ संक्रमण समस्या :

यदि वेजाइना में इचिंग की समस्या है, खुजली परेशान कर रही है, तो यूरिन टेस्ट के द्वारा इन्फेक्शन की जांच कराएं। अगर कुछ ना निकले, समझें कि ऐसा वेजाइनल पी एच लेवल में आ रहे बदलावों की वजह से रहा है। यह सामान्य बात है। इस खारिश से छुटकारा पाने के लिए बेकिंग सोडा में पानी मिला कर पेस्ट बनाएं और प्रभावित हिस्से में लगाएं। सफाई का पूरा ध्यान रखें। ख्याल रखें कि वेजाइनल एरिया हमेशा साफ और सूखा रहे। कॉटन की ढीली पैंटी पहनें। गर्भावस्था के दौरान योनि से स्राव की समस्या से लगभग हर स्त्री जूझती है यह इसलिए होता है क्योंकि गर्भाशय ग्रीवा और योनि की त्वचा बहुत नरम हो जाती है इसलिए डिस्चार्ज बढ़कर संक्रमण को योनि से गर्भ की और बढ़ने से रोकता है |

@ गर्भावस्था में मुँहासे :

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इनसे बचने के लिए आप कुछ केमिकल फ्री कास्मेटिक का उपयोग करे जैसे Tea Tree Bar Soap और मुँहासे के लिए कोई भी हर्बल लोशन |

@ शिशु की हलचल : 

36 से 40 सप्ताह के गर्भ में बच्चे की गतिविधिया और तेज हो जाती है! वह पेट में घूमना और लातें चलाना शुरू कर देता है। हर गर्भवती स्त्री जानती है कि दिनभर में कब गतिविधियां तेज हो जाती हैं। अपने गर्भस्थ शिशु के मूवमेंट के तरीके वह जानती है। अगर उसे महसूस हो कि उसका मूवमेंट काफी कम है या बिलकुल नहीं हो रहा है, तो यह समय निश्चित रूप से डॉक्टर को बुलाने का है। वे हॉस्पिटल जाने की सलाह दे सकते हैं, ताकि वह डॉक्टर की निगरानी में रहे और जरुरत पड़ने पर आवश्यक कदम उठाए जाएं।


आलू के सेवन से होते है अनेको बीमारियों में फायदे...

आलू के सेवन से होते है अनेको बीमारियों में फायदे...
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आलू के बारे में हम सभी जानते है आलू में विटामिन बी 6 और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बहुत अधिक होती है. इस कारण इसके सेवन से जहां एक और मांसपेशियों में मजबूती बनी रहती है वहीं मस्तिष्क की नसों की सेहत भी ठीक रहती है “आलू” एक खाने योग्य एक कंद है। मकई, गेहू और चावल के बाद यह दुनिया की चौथी सर्वाधिक उपयोग की जाने वाली खाद्य फसल है। आलू का महत्व और उसके उपयोग करने का तरीका भी दुनियाभर में दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। 



 तो चलिए जानते है आलू से होने वाले फायदों के बारे में -

@ ह्रदय का स्वास्थ रखने में :
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आलू में पाया जाने वाला फाइबर, विटामिन C और विटामिन B 6, साथ ही इसमें पाई जाने वाली कोलेस्ट्रॉल की कमी सभी ह्रदय के स्वास्थ के लिए गुणकारी है। आलू में प्रयाप्त मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो खून में पाए जाने वाले कोलेस्ट्रॉल की मात्रा में कम करने में सहायक है, इससे ह्रदय संबंधी विकार होने का खतरा टल जाता है। अभ्यास से यह भी पता चला है की, जो लोग रोज़ 4069 मिलीग्राम पोटेशियम का सेवन करने है उनमे पोटेशियम का पर्याप्त मात्रा में सेवन ना करने वाले लोगो की तुलना में ह्रदय विकार से मृत्यु होने का खतरा कम हो जाता है।
@ सुजन और जलन को कम करने में :
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आलू में पाया जाने वाला चोलीन (B श्रेणी का एक विटामिन) काफी गुणकारी माना जाता है, यह नींद, सिखने और स्मरण शक्ति में सहायक है। इसके साथ-साथ चोलीन चर्बी को कम करने और दीर्घकालीन सुजन एवं जलन को कम करने में भी सहायक है।
@ ब्लड प्रेशर को कम करने में :
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शरीर में सोडियम का कम मात्रा में सेवन करना स्वास्थकारी ब्लड प्रेशर के लिए बहुत जरुरी है, जबकि पोटेशियम का ज्यादा मात्रा में सेवन करना उसमे पाये जाने वाले वाहिकाविस्फार प्रभाव की वजह से महत्वपूर्ण है। साथ ही, देखा गया है की पोटेशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम (जो सभी आलू में पाए जाते है) भी प्राकृतिक रूप से ब्लड प्रेशर को कम करने में सहायक है।
@ पाचन क्रिया बढ़ाने में :
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आलू में पाए जाने वाले फाइबर की वजह से, आलू हमें कब्ज से बचाता है और स्वास्थकारी पाचन क्रिया के लिए नियमितता को बढाता है।
@ कैंसर से बचाने में :
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आलू में फोलेट पाया जाता है, जो डीएनए संमिश्रण और सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और डीएनए में कैंसर सेल्स के निर्माण की प्रक्रिया को रोकता है। फलो और सब्जियों जैसे आलू के माध्यम से जो फाइबर हम लेते है उसमे कोलेस्ट्रल कैंसर होने का खतरा काफी कम होता है। विटामिन C एक शक्तिशाली एंटीओक्सिडेंट है जो हमारे शरीर को होने वाले हानियों से बचाते है।
@ त्वचा को मुलायम व चमकदार बनाने में :
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त्वचा को नियंत्रित करने वाला तंत्र, कोलेजन साधारणतः विटामिन C पर निर्भर करता है, जो हमारे शरीर में सूरज, प्रदुषण और प्रदूषित धुए से होने वाले नुकसान को भरने का काम करता है। साथ ही विटामिन C हमारे शरीर में कोलेजन तंत्र की क्षमता को भी विकसित करता है और त्वचा में होने वाले झुर्रियो को हटाकर त्वचा को मुलायम बनाता है।
@ हड्डियों को मज़बूत बनाने में :
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आलू में पाया जाने वाला आयरन, फास्फोरस, कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिंक हड्डियों की रचना और उन्हें मजबूत बनाए रखने के लिये काफी उपयोगी है। आयरन और जिंक कोलेजन के उत्पादन और उसकी परिपक्वता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। जबकि फास्फोरस और कैल्शियम दोनों ही हड्डियों की संरचना को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है, और दो खनिज पदार्थो के संतुलन को बनाए रखना हड्डियों के स्वास्थ के लिए बहुत जरुरी है – क्योकि छोटी मात्रा के कैल्शियम के साथ ज्यादा मात्रा में फास्फोरस का सेवन करने से हड्डियों को क्षति भी पहुँच सकती है।

गर्भावस्था में रखे इन बातों की सावधानिया...

गर्भावस्था में रखे इन बातों की सावधानिया...
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गर्भावस्था में महिलाओं को खुद ही अपनी सेहत का ध्यान रखना पड़ता है। वहीं सेहत का ध्यान खान-पान के बगैर अधूरा है। गर्भावस्था महिला के लिए एक ऐसी अवस्था होती है, जब उसे अपने स्वास्थ्य के साथ-साथ होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य की भी चिंता करनी होती है। ऐसे में उसके लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह ऐसा पौष्टिक आहार ले जो उसे ताकत दे ही उसके बच्चे के लिए भी लाभदायक हो। ऐसे कई व्यंजनों पर महिलाएं ध्यान दे सकती है।जो गर्भावस्था में महिलाओं और उनके बच्चे दोनों के लिए लाभ दायक होंगी।




@ यदि आप भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, बीज वाली फलिया, मौसम के हिसाब से फल, दूधयुक्त खाद्य पदार्थ, सोयाबीन, दलिया, ओटमील, मूंगफली, अंकुरित दालें जैसी चीजों को सही मात्रा में लेती रहें तो निश्चित रूप से आप स्वस्थ रहेंगी और आपके होने वाले बच्चे का विकास भी सही रूप में होगा।

@ गर्भवती महिलाओं को भारतीय व्यंजन में ध्यान रखना चाहिए कि उनके व्यंजनों में प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, विटामिन, फोलिक एसिड जैसे पोषक तत्वों का समावेश हो, यदि वे इस बात का ध्यान रखेंगी तो गर्भावस्था के दौरान उन्हें कम परेशानियां होंगी।
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@ आमतौर पर कहा जाता है भ्रूण के विकास के लिए प्रोटीन बेहद आवश्यक है ऐसे में आपको अपने व्यंजनों में प्रोटीन की मात्रा का खास ध्यान रखना चाहिए। जो भी आप खाना लें उसमें प्रोटीन की भरपूर मात्रा हो। मछली, मासं, अंडे में प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है लेकिन आप शाकाहारी भोजन लेना पसंद करती हैं तो आपको् पनीरयुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन अवश्य करना चाहिए।


@ यह जरूरी नहीं कि गर्भवती महिलाएं भोजन की मात्रा पर ध्यान दें कि वह कब कितना भोजन ले रही है बल्कि सही मायनो में उन्हें भोजन की किस्म पर ध्यान देना चाहिए कि वह खुराक क्या ले रही हैं।गर्भावस्था के दौरान पोषक तत्व युक्त खाना बहुत जरूरी है। ये पौष्टिक खुराक ही बच्चे के विकास में बहुत उपयोगी है।

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@ गर्भावस्था में महिलाओं को अपने खाने में कैलोरी की मात्रा अधिक कर देनी चाहिए जिससे मां ओर बच्चे को भरपूर आहार मिल सकें।महिलाएं अपने खाने में दूध अंडे फल आदि लें और तैलीय खाने पर जितना हो संयम बरतें। भारतीय व्यंजनों के दौरान आप यदि स्वस्थ आहार लेती हैं तो आप स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से बच सकती हैं।