
अब ना कोई शक रह गया है ना कोई उम्मीद क्यूँकि काले धन और भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़के दिल्ली की सता में आए केजरीवाल काले धन के ख़िलाफ़ छेड़ी गयी मुहिम के ही ख़िलाफ़ हो गये हैं।
जैसा आप सब जानते ही हैं केजरीवाल ने काले धन पर मोदी जी की कार्रवाई का खुला विरोध करके खुद को सबकी नज़रों के सामने ख़ुद EXPOSE कर दिया है। देश और दिल्ली की जनता हैरान है कि काले धन पर कड़े कड़े और बड़े बड़े एक्शन लेने की बात करने वाला नेता अब काले धन पे एक्शन होने पर इतना बोखला क्यूँ गया है? सोशल मीडिया में आयी रिपोर्टों के अनुसार केजरीवाल का ये अजीब रूप देखकर उनकी मुहिम के साथी रहे कुमार विश्वास का भरोसा केजरीवाल से उठ रहा है ।
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वैसे तो कुमार विश्वास काफी दिनों से मीडिया पर नहीं दिखे और सारे घटनाकर्म से ग़ायब हैं वो एक कवि है और अपने अलग अलग कार्यक्रममों में भले ही व्यस्त रहते होंगे लेकिन अब माना ये जा रहा है कि कुमार विश्वास केजरीवाल की नीतियों से मन ही मन बहुत गुस्सा हैं हालाँकि उन्होंने सार्वजनिक मंच पर अभी केजरीवाल के ख़िलाफ़ कुछ नहीं कहा है।
केजरीवाल आए तो थे लोकपाल बनाने और काले धन के ख़िलाफ़ एक आंदोलन चलाकर लेकिन अब तो ऐसे विरोध कर रहे हैं जैसे सबसे ज़्यादा ५०० और एक हज़ार के नोट उन्ही के पास हों। उधर कुमार विश्वास जो ख़ुद भी आम आदमी पार्टी के बड़े नेता है लेकिन कहीं ना कहीं उन्हे अब ये लगने लगा है कि आम आदमी पार्टी अपने सारे सिद्धांतों से हट गई है और उसका मक़सद बस मोदी विरोध रह गया है ।
ये ही सबसे बड़ा कारण है कि कविराज बहुत ही जल्दी AAP से नाता तोड़ सकते है। बता दें कि विश्वास कई मौकों पर मोदी जी की तारीफ़ भी कर चुके हैं । कुमार के क़रीबी और उनको अच्छे से जानने वाले भी मानते हैं कि ये समय कविराज के जीवन का एकदम सही समय होगा जब वो केजरीवाल को छोड़ दें। मोदी जी पर भले ही केजरीवाल कितने ही आरोप लगा लें , लेकिन ये भी उतना ही सच है कि जनता नोट बंदी से परेशान होने के बावजूद मोदी जी के साथ खड़ी दिखाई देती है। लेकिन आख़िरी फ़ैसला तो कुमार विश्वास को करना है कि वो नोट बंदी एक एक्शन से बौखलाए अरविंद केजरीवाल का साथ देंगे या फिर नरेंद्र मोदी के पाले में आ जाएँगे ।
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