
आरएसएस यानि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, आज पूरे विश्व का सबसे बड़ा समाज सेवी संगठन है. भले ही हिन्दू विरोधी वामपंथी, मुस्लिम और कांग्रेस की विचारधारा के कुछ लोग इस संगठन को कोसते रहते हों लेकिन इस समाज के लिए जितना इस संघ ने किया शायद ही कोई कर पाया हो या कर सकता हो.
आज जहाँ एक और हिन्दू विरोधी संस्कृति के वामपंथी वैचारिक लोग अप्रेल फूल जैसे फूहड़ त्योहारों को मनाकर खुद को प्रोग्रेसिव होने का हास्यास्पद कृत्य में मस्त हैं तो वहीँ हिन्दू धर्म मो मानाने वाले और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के करोड़ों स्वयं सेवक अपने संगठन के जनक डाक्टर हेडगेवार जी को याद कर रहे हैं.
आज RSS के जनक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी का जन्मदिन है. आज ही के दिन 1889 में वह नागपुर में पैदा हुए थे. पेशे से डॉक्टर हेडगेवार बचपन से ही देशभक्ति के विचारों से ओतप्रोत थे. आरएसएस के स्वयंसेवक नाना पालकर ने अनुसार डॉक्टर साहब के बचपन की ऐसी कुछ घटनाओं का जिक्र किया है जिनसे प्रारंभित विचारों का पता चलता है. आइए हम आपको ऐसी ही दो घटनाओं के बारे में बताते हैं.
केशव अपने तीन भाइयों में सबसे छोटे थे. उनके पिता बलिराम पंत हेडगेवार चाहते थे कि उनके छोटे बेटे को आधुनिक शिक्षा मिले. पालकर लिखते हैं, “केशव को अंग्रेजी विद्यालय में भेजने का निश्चय हुआ. उन्हें महाल के पास ही नीलसिटी हाई स्कूल में भर्ती करा दिया गया.” लेकिन अंग्रेजी स्कूल में पढ़ने के बावजूद बालक केशव के मन में देश प्रेम के विचार आकार पाते रहे और बहुत जल्द ही बालक केशव की देशभक्ति की परीक्षा का वक्त आ गया.
बताया जाता है की 22 जून, 1897 को इंगलैण्ड की महारानी विक्टोरिया के राज्यारोहण के साठ वर्ष पूरे होने के चलते विदेशी सरकार ने यह अवसर फिर से एक बार अपने विजेतापन का डंका विजितों के मन में बजाने के लिए उपयुक्त समझा. राज्योहण के दिन सरकारी आज्ञा से समूचे देश के गांव-गांव में उत्सव मनाये गये.
प्रत्येक विद्यालय में राजनिष्ठा प्रकट करनेवाले समारोहों का आयोजन हुआ. झण्डे, पताका, हार, तुर्रे, वाद्य, इत्र, तथा स्वाभिमानशून्य भाषणों के साथ ही बच्चों को मिठाई बाँटने का कार्यक्रम भी इन समारोहों में रखा गया था.” जाहिर है ये मिठाई भारत की गुलामी का प्रतीक थी. बालक केशव को ये बात बहुत खल रही थी इसलिए मिठाई के पुड़े को उसने कचरे के डब्बे में फेंक दिया.
ऐसा नहीं है कि केशव ने वो मिठाई बचपने में फेंक दी थी. वल्कि उनके मन में गुलामी को लेकर बहुत गुस्सा था. कुछ ही साल बाद एक बार ऐसा ही मौका आया और उस समय भी उनका बरताव वही रहा.
साल 1901 ईसवी में ब्रिटिश बादशाह एडवर्ड सप्तम के राज्यारोहण के पर स्थानीय मिल के मालिकों ने आतिशबाजी जलाकर ब्रिटिश हुकूमत के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर करने का फैसला लिया.
इस आलीशान आतिशबाजी को देखने के लिए बालक केशव के कई मित्र निकल पड़े. लेकिन जब मित्रों ने केशव से साथ चलने को कहा तो उन्होंने उत्तर दिया, ‘‘विदेशी राजा का राज्यारोहण उत्सव मनाना हमारे लिए लज्जा का विषय है, अतः मैं नहीं चलूँगा’’
इसी पीड़ा के चलते उन्होंने 1925 में आरएसएस की स्थापना की और आज वही आरएसएस दुनिया का एक विशालकाय बृक्ष बन चुका है जिसकी छाँव तले हिन्दू सुरक्षित हो रहा है.
आज देश और दुनियाँ को स्व-अनुशासन सिखाने वाले डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी को उनके जन्म दिवस पर हिंदुत्वा इन्फो परिवार की तरफ़ से शत शत नमन !!
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