
कांग्रेस सरकार और मोदी सरकार में बहुत बड़ा अंतर है,और ये अंतर आज आप भी इस पोस्ट के माध्यम से समझ जाओगे.भारत की इस नयी मोदी सरकार ने पाकिस्तान को लेकर अपनी राजनितिक इच्छा शक्ति को मजबूत किया है और साथ ही पाकिस्तान को लेकर अपने रुख में बहुत बड़ा बदलाब किया है.
1984 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रॉनल्ड रीगन ने कहा था, ‘एक न्यूक्लियर वॉर कभी जीती नहीं जा सकती और यह कभी लड़ी भी नहीं जानी चाहिए।परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर भारत की नीति में बदलाव का पहला इशारा पिछले साल नवंबर में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के बयान से मिला। पर्रिकर ने सवाल उठाया कि आखिर क्यों भारत को परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की पहल करने से खुद को रोकना चाहिए।
इन अटकलों को उस वक्त और ज्यादा बल मिला, जब विश्व प्रसिद्ध मेसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी ( MIT) के विद्वान विपिन नारंग ने वॉशिंगटन में आयोजित इंटरनैशनल न्यूक्लियर पॉलिसी कॉन्फ्रेंस में अपनी राय रखी।
नारंग के मुताबिक, भारत परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से जुड़ी ‘नो फर्स्ट यूज’ पॉलिसी को छोड़ सकता है। अगर उसे लगता है कि पाकिस्तान उसके खिलाफ किसी भी तरह का न्यूक्लियर हमला करने की योजना बना रहा है तो वह पहले ही परमाणु जंग छेड़ सकता है।
नारंग ने कहा था, ‘भारत का शुरुआती प्रहार पारंपरिक हमलों की तरह नहीं होगा। भारत अपने दुश्मन के छोटी रेंज के नस्र न्यूक्लियर मिसाइल सिस्टम को तबाह करने तक ही खुद को सीमित नहीं रखेगा। वह एक बड़ा और व्यापक हमला करेगा, जिसका मकसद पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों के जखीरे को पूरी तरह बर्बाद करना होगा। इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि भारत अब पाकिस्तान को पहले हमला करने का मौका नहीं देगा।’
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