
बिहार समेत देश के दूसरे हिस्सों में भी बिहार दिवस मनाया जा रहा है, लेकिन पटना में आयोजित मुख्य कार्यक्रम से लालू प्रसाद यादव के परिवार के गायब रहने को लेकर राजनीति एक बार फिर से गर्म होती दिख रही है। दरअसल इस कार्यक्रम से लालू परिवार के गायब होने के पीछे ये वजह बताई जा रही है किइस प्रोग्राम के निमंत्रण पत्र पर डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव का नाम नहीं था, बस इसी बात को लेकर लालू परिवार नाराज हो गया और इस परिवार के किसी भी सदस्य ने इस कार्यक्रम में शिरकत नहीं की।
पटना के गांधी मैदान में हुए मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत कई अन्य वरिष्ठ मंत्री भी दिखे, लेकिन राजद सुप्रीमो का पूरा कुनबा गायब था, यहां तक कि उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी गायब थे, हालांकि जब उनके इस कार्यक्रम में उपस्थित ना होने का कारण पूछा गया, तो उन्होने कहा कि उनकी तबियत ठीक नहीं थी,
इसी वजह से वो इस समारोह में शामिल नहीं हो सके। लेकिन तेजस्वी के इस समारोह में शामिल नहीं होने की वजह से राजनीतिक गलियारों में चर्चा फिर से जोड़ पकड़ने लगी है, बिहार की राजनीति के समझ रखने वाले लोगों का कहना है कि ये महागठबंधन पांच साल पूरा नहीं कर पाएगी।
आपको बता दें कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि नीतीश कुमार यूपी चुनाव के बाद एनडीए में शामिल हो जाएंगे, बिहार की राजनीति में फिलहाल जो स्थिति बनती दिख रही है, उससे तो यही प्रतीत होता है कि शायद पूर्व सीएम की भविष्यवाणी सत्य हो जाएगी।

इससे पहले भी राजद के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री सार्वजनिक रुप से ये कह चुके हैं कि वो तेजस्वी को सीएम के रुप में देखना चाहते हैं, तो मां राबड़ी देवी और पिता लालू प्रसाद यादव की भी इच्छा है कि बेटा सीएम बनें, फिलहाल बिहार की महागठबंधन सरकार में जो स्थिति है, उसके अनुसार राजद सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन लालू प्रसाद यादव के चुनाव नहीं लड़ने की वजह से उन्होने नीतीश कुमार को महागठबंधन का नेता चुना था।
लेकिन बिहार में जिस तरह की राजनीतिक उठा-पटक हर दिन देखने को मिल रही है, जिस तरह से महागठबंधन के नेता एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर रहे है, उसे देखकर तो यही कहा जा सकता है कि महागठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं है, आपको बता दें कि नीतीश कुमार 2013 से पहले करीब 14 साल तक बीजेपी के साथ एनडीए गठबंधन में रहे हैं, लेकिन नरेन्द्र मोदी से मतभेद की वजह से नीतीश ने अपना रास्ता अलग कर लिया था, हालांकि नीतीश को करीब से जानने वाले लोगों का कहना है कि अगर उनकी कुर्सी खतरे में पड़ी, तो एक बार फिर से वो एनडीए में शामिल हो जाएंगे, और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की भविष्वाणी को सच साबित कर देंगे।
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