नोटबंदी के बाद काफ़ी लोग मोदी जी से नाराज़ हो गये हैं और काफ़ी लोग काफ़ी ख़ुश हैं , क्या आपको लगता है नोटबंदी का ये फ़ैसला जल्दबाज़ी में लिया गया है ? यदि लगता है तो समझ लीजिए आप ग़लत हैं क्यूँकि बहुत बड़े बड़े ख़ुलासे हो रहे हैं । मोदी जी ने बहुत कोशिस की थी कि इस क़दम को धीरे धीरे लागू किया जाए पर जब उन्होंने आँकडें देखे तो उनका दिमाग़ सून्न हो गया । देश की अर्थव्यवस्था की हालत पिछली सरकार ने इस क़दर ख़राब कर दी थी ।
अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसी क्या गुत्थी उलझ गयी थी तो आज आपके इस सवाल का जवाब हम आपको दे रहे हैं। हमने कल एक लेख के द्वारा आपको बताया था कि सोशल मीडिया में एक ही नम्बर के नोट बार बार आ रहे हैं और लोगों की लगातार इस बारे में शिकायतें आ रही हैं । बड़े बड़े अर्थशास्त्रियों से जब हमने इस बारे में जानने की कोशिस की तो पाया कि ऐसा माना जा रहा है कि UPA सरकार के कार्यकाल में जाली नोटों के कारोबार को इतना बढ़ावा दिया कि अगर मोदी जी नोटबंदी नहीं करते तो हमारे देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ख़त्म हो जाती। UPA सरकार की कुशासन की कमियों और भ्रष्ट आचरण की वजह से भारत की इकॉनमी की नींव बिलकुल खोखली हो गयी थी ।
UPA सरकार की सुस्ती, भ्रष्टाचार का यह हमला देश पर इतना भारी पड़ा कि ये तो पाकिस्तान की तरफ से हुए किसी बड़े आतंकी हमले से भी ज्यादा खतरनाक हो गया मामला साफ़ है भेदी हमारे घर के अंदर बैठा है और पैसों का लालच इस देश को ले डूबता । शुक्र मनाएँ कि समय पर मोदी सरकार आ गयी वरना जाने क्या हालत होने वाले थे ।
देखें एक ही नम्बर के नोटों की तस्वीरें
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