
आपको ये बात पढ़कर जरुर हैरानी होगी कि मुस्लिम देश ईरान की राजधानी तेहरान में आज तक कोई सुन्नी मस्जिद नही बनी है और न कभी बन सकती है क्यूंकि ईरान अपनी राजधानी में किसी सुन्नी मस्जिद को बनवाने के लिए जगह देने के लिए तैयार नही है .
आपको बता देते है कि ईरान उन देशो में से एक है जहाँ पर शिया मुस्लिम रहते है अब आपको शिया और सुन्नी के बारे में अगर नही पता है तो जान लीजिये जैसे भारतीयों में कई प्रकार की जातियां होती है वैसे ही मुसलमानों में भी केवल 2 प्रकार की जातियां है जिनमे से एक सुन्नी तो दूसरी शिया है .
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1979 की क्रांति के बाद मुस्लिम समुदाय दो ग्रुपों में बंट गया था जिसमे से सुन्नी समुदाय सउदी अरब में और शिया ईरान के नेतृत्व में अपना दबदबा बनाने लगे थे इसके बाद सउदी अरब में शिया की विचारधाराओ का विरोध किया जाने लगा क्यूंकि वहां पर सुन्नी समुदायों का बोलबाला था .
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अरब देश में जहाँ शिया मुस्लिम थे उन्हें कभी भी राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्र में आगे बढने नही दिया गया इसके साथ मिस्त्र के पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने आरोप लगाया था कि शिया हमेशा अपने मुल्क देशो की बजाय ईरान के प्रति बफादारी दिखाते आ रहे है ये भी एक कारण था कि अरब के सुन्नी चाहते कि शियाओ को भी सुन्नी धर्म अपनाने के लिए कह दिया जाए .
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